October 3, 2018
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‘रामनाम’ आणि त्याचबरोबर इतर जप लिहिणे हेच या आगळ्यावेगळ्या बँकेचे भक्तिचलन आहे. कमीत कमी एक वही लिहून ती जमा केली की ह्या रामनाम बँकेचा सभासद होता येते. सभासद झाल्यावर प्रत्येक श्रद्धावानाला एक पासबुक दिले जाते.

सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध (बापू) सांगतात की, श्रद्धावानाला जेव्हा संकट काळात मदतीची, आधाराची खरी गरज असेल, तेव्हा सद्गुरुतत्व, ते परमतत्त्व त्याला ह्या ‘भक्ति बँकेतून’ आवश्यक तेवढे सहाय्य नक्कीच पुरवणार. ज्याचे त्याच्या सद्गुरुतत्त्वावर जेवढे प्रेम त्याला त्या प्रमाणात त्याचे ‘भक्तिरूपी व्याज’ सहाय्याच्या स्वरूपात मिळते.

बँकेच्या कामकाजाचे वर्ष अनिरुद्ध पौर्णिमा (कार्तिक पौर्णिमा) ते अनिरुद्ध पौर्णिमा (कार्तिक पौर्णिमा) असे आहे. सर्व ‘सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्ध उपासना केंद्रं’ ह्या बँकेच्या शाखा आहेत. ही बँक युनिव्हर्सल असल्यामुळे श्रद्धावान आपली लिहून पूर्ण झालेली वही कुठल्याही शाखेत जमा करू शकतात.

प्रत्येकाची वही प्रत्येकाने स्वत:च लिहून पूर्ण करायची आहे. रामनाम वहीच्या पहिल्या पानावर (अर्पण पत्रिकेवर) आपले संपूर्ण नाव, खाते क्रमांक व वही कोणासाठी लिहिली आहे याची माहिती असते. श्रद्धावानांनी अशाप्रकारे जमा केलेल्या प्रत्येक वहीतील पहिली पाने (अर्पण पत्रिका) प्रत्येक महिन्याच्या पौर्णिमेला किंवा एकादशीला एकत्र करून त्यांचे पूजन केले जाते.

एका वर्षामध्ये श्रद्धावानाने किमान १८ वह्या जमा केल्यावर त्या श्रद्धावानाला त्या वर्षाचे बॅंकेचे वार्षिक सभासदत्व मिळते. खाते उघडलेल्या तारखेपासून पुढील पाच वर्षात १५० वह्या जमा केल्या, तर तो श्रद्धावान बँकेचा आजीव सभासद होतो. वही लिहिणार्‍या श्रध्दावानाला ठराविक वह्या लिहिल्यानंतर विशिष्ट लाभ मिळतात. श्रद्धावानांनी जमा केलेल्या ह्या रामनाम वह्यांपासूनच गणेशमूर्ती व सच्चिदानंद पादुका तयार केल्या जातात. त्यामुळे ही ‘अनिरुद्धाज् युनिव्हर्सल बँक ऑफ रामनाम’ भक्तिच्या पवित्र साधनाबरोबरच प्रत्यक्ष जीवनात आपल्या आजूबाजूच्या पर्यावरणाचे रक्षण करण्यासही मोलाचे योगदान देते.

 

हिंदी English

 


August 30, 2018
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‘रामनाम’ और इसके साथ ही साथ अन्य जप लिखना ही इस अनोखी बैंक का भक्तिचलन है। कम से कम एक बही लिखकर जमा करने पर इस बैंक की सदस्यता पाई जा सकती है। सदस्य बनने पर प्रत्येक श्रद्धावान को एक पासबुक दिया जाता है।

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध (बापू) कहते हैं कि, “श्रद्धावान को जब संकट की घड़ी में मदद की, आधार की वास्तव में जरूरत होती है, तब सद्‌गुरुतत्त्व, वह परमतत्व उसे इस ’भक्ति बैंक’ से आवश्यकता अनुसार सहायता निश्चितरूप से प्रदान करेंगे।” जिसका उसके सद्‌गुरु पर जितना प्रेम है उसे उतने प्रमाण में भक्तिरुपी ब्याज सहायता स्वरूप प्राप्त होता है।

बैंक के कामकाज का वर्ष अनिरुद्ध पूर्णिमा (कार्तिक पूर्णिमा) से अनिरुद्ध पूर्णिमा (कार्तिक पूर्णिमा) तक है। सभी ‘सद्‌गुरु अनिरुद्ध उपासना केन्द्र’ इस बैंक की शाखाएँ हैं। यह बैंक युनिवर्सल होने के कारण श्रद्धावान अपनी लिखकर पूरी की गई बही किसी भी शाखा में जमा करा सकते हैं।

हर किसी को अपनी बही स्वयं ही लिखकर पूर्ण करनी होती है। रामनाम बही के पहले पन्ने पर (अर्पण पत्रिका पर) अपना पूरा नाम, खाता क्रमांक तथा बही किसके लिए लिखी गई है यह जानकारी होती है। श्रद्धावानों द्वारा इस तरह जमा की गई प्रत्येक बही के पहले पन्ने (अर्पण पत्रिकाएं) हर महीने की पूर्णिमा के दिन अथवा एकादशी के दिन एकसाथ पूजे जाते हैं।

एक वर्ष में श्रद्धावानों द्वारा कम से कम १८ बहियाँ जमा किए जाने पर उन्हें उस वर्ष के लिए बैंक की सदस्यता प्रदान की जाती है। खाता खोलने के दिन से लेकर पहले पाँच वर्षों में १५० बहियाँ जमा करने पर श्रद्धावान बैंक का आजीवन सदस्य बन जाता है। बही लिखनेवाले श्रद्धावान द्वारा निश्चित संख्या में बहियां जमा कराने पर विशिष्ठ लाभ प्राप्त होते हैं। श्रद्धावानों द्वारा जमा की गई इन रामनाम बहियों से ही गणेशमूर्तियां एवं सच्चिदानंद पादुकाएं बनाई जाती हैं। इसीलिए यह अनिरुद्धाज्‌ युनिवर्सल बैंक ऑफ रामनाम भक्ति के पवित्र साधन के साथ साथ प्रत्यक्ष जीवन में अपने इर्दगिर्द पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्त्वपूर्ण योगदान प्रदान करता है।

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध द्वारा २००५ में शुरु की गई इस अनोखी बैंक के खाताधारक बनकर आज की तारीख में लाखों श्रद्धावान  भक्तिमार्ग की सहज, आसान यात्रा का आनंद उठा रहे हैं

 

English मराठी

 


August 29, 2018
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‘रामनाम सबसे पवित्र नाम है, गुरु नाम सबसे पवित्र नाम है, मैं इस रामनाम की, इस भगवद्‌ नाम की बैंक खोल रहा हूँ।’

सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्धजी के इन शब्दों के साथ, सर्वसामान्य श्रद्धावानों का जीवन आनंददायी एवं सुखी संपन्न बनाने के उद्देश्य से १८ अगस्त २००५ को एक अनोखे एवं निराले उपक्रम का शुभारंभ हुआ। उसका नाम है, ‘अनिरुद्धाज् युनिवर्सल बैंक ऑफ रामनाम’!

बैंक, बैंक का व्यवहार एवं उसके नियमों की बात आती है तो आज भी सर्वसामान्य व्यक्ति कुछ हद तक हिचकिचाता है। परन्तु ‘रामनाम’ की यह बैंक सभी प्रकार के भय, दिक्कतें एवं चिंताओं को दूर भगाती है। हर एक श्रद्धावान को अपनीसी लगनेवाली ये बॅंक सरल और आसान नियमों पर आधारित है।

‘अनिरुद्धाज युनिवर्सल बैंक ऑफ रामनाम’ की स्थापना के पहले महीने में ही इस बैंक में ४३१३८ अकाऊंट खोले गए और ६२१५८ रामनाम की बहियां जमा हुईं।

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