AnjanaMata Book

अंजनामाता बही

भगवंत से सामीप्य अधिक बढे तथा भक्तिमार्ग पर अधिकाधिक और रफ्तार से प्रगति हो सके, इसलिए सद्‍गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने सन २०११ में ’श्रीवरदचण्डिका प्रसन्नोत्सव’ में ‘अनिरुद्धाज युनिवर्सल बैंक ऑफ रामनाम’ को एक अनोखा उपहार दिया और वह अनोखा उपहार था ‘अंजनामाता बही’। 

अंजनामाता के (आदिमाता अंजनी के) पुत्र हैं महाप्राण हनुमानजी। ये एकमात्र ‘हनुमानजी’ ही ऐसे हैं जिन्होंने ‘स्वाहा’ (पूर्ण समर्पण) एवं ‘स्वधा’ (पूर्ण स्वावलंबन, स्वयंपूर्णता) दोनों गुणों को धारण किया है। इसीलिए स्वधाकार प्राप्त करने हेतु ‘ॐ हरि मर्कटाय स्वाहा’ नामक मंत्र हनुमानजी के बाएं चरणतले लिखा जाएगा ऐसी रचना इस बही में की गई है।

 

अंजनामाता बही – जप संख्या

जाप जप संख्या
ॐ श्रीपंचमुखहनुमन्ताय आंजनेयाय नमो नम:।
ॐ हरिमर्कटाय स्वाहा।
श्रीमहाकुंडलिनी अंजनामाता विजयते।
ॐ अंजनीसुताय महावीर्यप्रमथनाय स्वाहा।
ॐ श्री रामदूताय हनुमन्ताय महाप्राणाय महाबलाय नमो नम:।

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