श्रीरामनवमी उत्सव

सन १९९६ से प्रतिवर्ष #सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध के मार्गदर्शन के अनुसार श्रद्धावान #श्रीरामनवमी_उत्सव बहुत ही #आनंद एवं उत्साह के साथ संपूर्ण #भक्तिमय वातावरण में मना रहे हैं।

दिपशिखा आगमन 
सुबह दिपशिखा के आगमन के साथ श्रीरामनवमी उत्सव का शुभारंभ होता है। यह दिपशिखा साईनिवास, वान्द्रे से आती है।

श्रीसाईराम सहस्त्र यज्ञ 
इस दिफ्शिखा के द्वारा ’श्रीसाईराम सहस्त्रयज्ञ’ की अग्नि प्रज्वलित की जाती है। दिन भर तारकम्न्त्रोंके जाप के साथ चलने वाले इस यज्ञ में ’क्षेमकल्याण आपत्तिनिवारक पवित्र समिधाओं’ को श्रद्धावान स्वेच्छा से अर्पण करते हैं। इन समिधाओंका अर्पण करने से भक्त के मन एवं प्राणों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, साथ ही गतजन्मों के पापोंका भर्जन होता है ऐसा श्रद्धावानोंका विश्वास है।

रेणुकामाता पूजन 
रामनवमी उत्सव के दिन उत्सव स्थल पर रेणुकामाता का पूजन किया जाता है। तांदळे के रुप मे याने रेणुकामाता के मुख के रुप में मॉ का आगमन होते ही माता का जयजयकार किया जाता है। रेणुकामाता का औक्षण करके मंगलवाद्यों के घोष में उत्साह के साथ स्वागत किया जाता है। फिर रेणुकामाता का षोडश उपचार अर्पण कर पूजन करके ’सहस्त्रधारा अभिषेक’ किया जाता है जिससे अभिषेक किया जाता है, उस पात्र की रचना गोमाता के स्तन की रचनाके समान होने के कारण अनेक धाराओंके रुप मे अभिषेक होता है और इसी कारण इसे ’सहस्त्रधारा अभिषेक’ कहा जाता है। फिर स्वयं सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध रेणुकामाता की आरती करते है। माता रेणुका की वत्सलता की प्राप्ति जिस तरह भगवान की परशुरामजी को हुई, उसी तरह हम सबको भी उनकी वत्सलता की प्राप्ति हो’ यह प्रार्थना भक्तगण मॉ के चरणों में करते है।

रामजन्म
रामनवमी का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम है ’रामजन्म समारोह’। परमपूज्य सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध के मार्गदर्शन के अनुसार दोपहर १२.३० बजे श्रीरामजन्म पारंपारिक पद्धतिसे मनाया जाता है। सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध के बचपन में पालने के रूप में जिस झोली का उपयोग किया गया, उसी का उपयोग श्रीराम-जन्म के समय किया जाता है। ’कुणी गोविंद ध्या कुणी गोपाळ घ्या’ के गजर में और रामजन्म का पलना गने में सभी को सोंठ आदि से बना ’सुंठवडा’ प्रसाद के रुप में दिया है। यह पालना और उसमें प्रतीक स्वरूप में विराजमान श्रीराम इनका श्रद्धावान दर्शन कर सकते है।

साईनाथ महिन्मभिषेक
श्री साईसदाशिव मूर्ति को ‘श्रीसाईनाथ महिन्माभिषेक’ किया जाता है। हर एक भक्त इस समय स्वेच्छा से प्रतीकात्मक पूजा-अभिषेक कर सकता है। यह अभिषेक परिवार के सभी व्यक्तियों के स्वास्थ्य के लिए यह अभिषेक उपयोगी साबित होता है, ऐसी श्रद्धा है।

तळीभरण
मंगल्वाद्यों के घोष में ‘रक्ष रक्ष साईनाथ, श्री साईराम’ यह जाप करते हुए जब श्रद्धावान तळीभरण करता है, तब उस श्रद्धावान को अन्नदात करने का पुण्य तो मिलता ही है, साथ ही परमेश्वर के आशिर्वाद भी मिलते हैं। श्रद्धावान इस विधि में आनन्द से सम्मिलित होते है।

अखंड जप
‘ॐ रामाय रामभद्राय रामचंद्राय नम:।’ यह जाप उत्सवस्थल पर दिन भर अखंड रुप से चलता रहता है। श्रद्धावान एक-दुसरे के माथे पर तिलक करके एक-दुसरे को प्रणाम करते है और बडे ही भक्तीभाव के साथ इस जाप में सम्मिलित होते हैं

श्रीसाईचच्चरित अध्ययनकक्ष
रामनवमी उत्सवस्थल पर एक कक्ष में श्रीसाईच्चरित के एक अध्याय का सामूहिक अखंड पाठ चलता रहता है। इस कक्ष को ’श्रीसाईसच्चरित अध्ययन कक्ष’ या ’आद्यपिपा कक्ष’ कहते है। ‘आद्यपिपादादा’ यानी ‘श्री. सुरेशचंद्र पांडुरंग दत्तोपाध्ये’ ये श्रीसाईनाथजी के निस्सीम भक्त और सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध के श्रेष्ठ श्रद्धावान थे। जैसा कि श्रीसाईसच्चरित में बताया गया है, उसके अनुसार प्रतिवर्ष ‘रामनवमी’, ‘गुरुपौर्णिमा’, ‘कृष्णाष्टमी’, और ‘दशहरा’ इन चार पवित्र दिनों पर वे अपने श्रीसाईसच्चरित पारायण सप्ताह की सांगता करते थे और यह उनकी ६० वर्षों की परिपाठी थी। श्रीसाईसच्चरित के ग्यारहवे अध्याय में आये वर्णन के अनुसार श्रीरामचरणोंकी अखंड प्राप्ति होगी’ यह पक्ति उनके जीवन में सच हुई थी। हर एक श्रद्धावान, जो इस कक्ष में प्रवेश करता है, वह आद्यपिपा की तरह पूर्ण श्रद्धावान बनने का निश्चय करके श्रीसाईसच्चरित के अध्याय के पाठ मे सम्मिलित होता है।

श्रीरामनवमी उत्सव
श्रद्धावानोंके मन में रामभक्ति सदैव जागृत रहे, दिन ब दिन बढती ही रहे और हर एक के जीवन में श्रीरामचरणोंकी ’अखंड प्राप्ति’ होने की स्थिति रहे इसी आत्मीयता के साथ सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध अखंड कार्यरत रहते हैं। ’रामजन्मोत्सव’ मनाने के पीछे उनका यही हेतु है।

इस तरह सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध श्रद्धावानों के मन में रामभक्ती को सदैव जागृत रखते हैं। रामनावमी उत्सव की रात को पूर्णाहुती के बाद साईराम सहस्त्रयज्ञ संपन्न होता है और फिर महाआरती के बाद रामनवमी उत्सव की सांगता होती है। श्रीरामनवमी उत्सव में सम्मिलित हुआ हर एक श्रद्धावान यह ’अनिरुद्ध-महावाक्यम्‌’ अपने जीवन में उतारने का निर्धार करते हुए ही घर लौटता है।

युद्ध करेंगे मेरे श्रीराम। समर्थ दत्तगुरु मूल आधार ॥
मै सैनिक वानर साचा। रावण मरेगा निश्चित ही ॥


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